Anugat By Ramkumar Bhramar PDF

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Anugat By Ramkumar Bhramar

Book Type- Hindi Religion ebooks
File Format- PDF
Language- Hindi
Total Pages- 132
Size- 52Mb
Quality- HQ, without any watermark,

अनुगत – रामकुमार भ्रमर

अनुगत रामकुमार भ्रमर द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण हिंदी कृति है, जिसका प्रकाशन सन् 1985 में दिल्ली से हुआ था। यह पुस्तक लगभग 120 से अधिक पृष्ठों की एक गंभीर और विचारप्रधान रचना मानी जाती है। यद्यपि यह अत्यधिक चर्चित साहित्यिक कृतियों में शामिल नहीं है, फिर भी यह अपने समय की सामाजिक और मनोवैज्ञानिक परिस्थितियों को दर्शाने वाली महत्वपूर्ण रचना है।

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शीर्षक का अर्थ और संकेत

“अनुगत” शब्द का अर्थ होता है – पीछे चलने वाला, अनुसरण करने वाला, आज्ञाकारी या समर्पित। इस शीर्षक से ही स्पष्ट होता है कि पुस्तक का मूल भाव निष्ठा, समर्पण, संबंधों की गहराई और मानवीय कर्तव्यबोध से जुड़ा हुआ है। लेखक संभवतः इस कृति के माध्यम से यह दिखाना चाहते हैं कि मनुष्य का जीवन केवल स्वतंत्रता का नाम नहीं, बल्कि कई बार संबंधों और जिम्मेदारियों का अनुसरण भी होता है।

विषयवस्तु और सामाजिक पृष्ठभूमि

यह कृति 1980 के दशक के भारत की सामाजिक परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करती प्रतीत होती है। उस समय भारतीय समाज परंपरा और आधुनिकता के बीच संघर्ष कर रहा था। परिवार, नैतिक मूल्य, सामाजिक अपेक्षाएँ और व्यक्तिगत इच्छाएँ – इन सबके बीच व्यक्ति का मन उलझा रहता था।

संभवतः “अनुगत” में ऐसे पात्रों का चित्रण है जो अपने कर्तव्यों, प्रेम, परिवार या सामाजिक मान्यताओं के प्रति समर्पित हैं। वे अपनी इच्छाओं को त्यागकर दूसरों के लिए जीते हैं। इस प्रकार लेखक ने यह प्रश्न उठाया होगा कि क्या समर्पण व्यक्ति को महान बनाता है या उसकी स्वतंत्रता को सीमित कर देता है।

लेखन शैली

रामकुमार भ्रमर की भाषा सरल, स्पष्ट और भावप्रधान है। उनकी शैली में अनावश्यक अलंकरण नहीं, बल्कि सीधे और सटीक शब्दों के माध्यम से भावों की अभिव्यक्ति मिलती है। वे मनोवैज्ञानिक गहराई के साथ पात्रों की अंतरात्मा की आवाज को सामने लाने का प्रयास करते हैं। कथा में बाहरी घटनाओं की अपेक्षा आंतरिक संघर्ष और भावनात्मक द्वंद्व अधिक प्रमुख दिखाई देता है।

नैतिक और दार्शनिक दृष्टिकोण

इस कृति में निष्ठा, कर्तव्य, प्रेम और त्याग जैसे मूल्यों पर विशेष बल दिया गया होगा। लेखक यह दिखाते हैं कि जीवन में केवल स्वयं के लिए जीना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि दूसरों के प्रति उत्तरदायित्व भी उतना ही महत्वपूर्ण है। “अनुगत” का पात्र संभवतः अपने जीवन में ऐसे निर्णय लेता है जो उसे व्यक्तिगत रूप से कठिन लगते हैं, परंतु नैतिक दृष्टि से उचित होते हैं।

साहित्यिक महत्व

हालाँकि “अनुगत” अत्यधिक प्रसिद्ध कृति नहीं है, फिर भी यह हिंदी साहित्य की उस परंपरा का हिस्सा है जो सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं को प्रमुखता देती है। यह पुस्तक पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है और उन्हें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन में सच्चा मूल्य क्या है – स्वतंत्रता या समर्पण?

निष्कर्ष

“अनुगत” एक गंभीर, संवेदनशील और विचारोत्तेजक हिंदी कृति है, जो मानव जीवन के भावनात्मक और नैतिक पक्षों को उजागर करती है। यह पाठकों को जीवन, संबंधों और कर्तव्यों के महत्व को समझने का अवसर देती है।

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